Posted by: RAJ | May 4, 2016

प्रबोधन

देर सबेर मेरे  विचारो को… मेरी कलम से उभरना ही  था
बन मेरी कविता की पकंति इसे तुम तक पहुँचना ही था।

लिखते…लिखते ख्याल तुम्हारा  रुक सा गया हैं…… जाने क्या अन्दर कुछ खो सा गया है

जाने क्या सोच कर मैं तेरे पनाह का आगाज़ करता हुँ,….
अपने सांसो के अतंराल तुझे ही खोजने की कोशिश करता हुँ…

मिल भी गये तो पहचानुगाँ कैसे मैं… तेरे शक्ल की रूप रेखा की प्रेरणा भी तो मैं हुँ

तुम से मैं बना या मैनें तुझे बनाया… इस पुरे फसाद़ की जड़ भी तो मैं ही हुँ।

 

ये खेद़ है उस विल़ब का… जिसकी प्रेरणा मेरा अह्म‍ है
खो देना है  हर उस विचार को‍… जो आज बना तेरे मेरे बीच का…  वह्म हैं

 

नियती क्या है इस जीवन की… सवाल है हर पल मेरे मन में…
मिल जाउँगा खुद से मै… जब  होगा प्रबोधन तेरे शरण में।

 

रचनाकार
रजनीश सिन्हा

मेरी ज़िन्दगी के हर जीत और हार में मेरा अहम नज़र आता है
मेरे जीवन के हर राह के चुनाव में मेरा मंतव्य नज़र आता है ….
पर उस जीत और हार के निरर्थक होने का मतलब मेरा अध्यापक बतलाता है …
ज़िन्दगी के हर मोड़ पे मेरा अध्यापक नज़र आता है ……

मेरी खुशियों की क्य्रारीयों में … मेरे संजोये हुए सपनो का क्रम नज़र आता है …
जिसकी बरकत का श्रेय मेरे भावी कन्धों को जाता है
उसने तो बोये कई पौधे हर साल जो बढे…. बन स्तम्भ देश और दुनिया के लिए हर बार ….
आज भी उस क्लास के देहलीज़ पे खड़ा …मेरा अध्यापक नज़र आता है ….

अपने जीवन के सुखी निर्वाह लिए भगवान् को पूजता हर इंसान नज़र आता है …..
तेरे सीखाये सबक को फिर दोहरा ले तो उस खुदा का प्रतिबिम हर जगह नज़र आता है ….
भूला नहीं मैं आज भी तुझे ..पर एक सवाल आज भी मुझे मूक बना जाता है ..

क्या मेरे करम में मेरा अध्यापक नज़र आता है ?

Posted by: RAJ | December 24, 2011

साँसों की माला

मेरे साँसों के आरोह में … तेरे केसुओं की महक मुझे मदहोश करे
मेरी आंखं मूँद कर ……….मेरा दिल तेरा ध्यान करे

मेरे साँसों के ठहराव में .. तेरे आवाज़ की चहक मेरे मन में रस घोल दे
मेरे चहरे पर मुस्कान ला कर मेरा दिल .. तेरे होने का आगाज़ करे

मेरे साँसों के अवरोह में ..तेरे तन की खुशबू मुझे शिथिल करे
मेरे इन्द्रियों को गुगुदा कर … तेरा मुझ में होने का एहसास करे

अब इन साँसों का सिलसिला तुमसे जुड़ गया है …
हर एक ऐसा एहसास …मेरे साँसों की माला सा बन गया
लगता है उस खुदा से नाता फिर जुड़ गया है|

Posted by: RAJ | July 23, 2011

यह लम्हा !!

सादगी कभी तैयारी के साथ नहीं आती !
मुस्कुराहट किसी समय कोई सोच बन कर नहीं छुप जाती !
चलती है तो है बस सासें .. जो मंजिल पर आ कर नहीं रुक जाती |

जिंदगी कभी घडी के काटों में नहीं गिनी जाती !
ख़ुशी किसी समय कोई आसूं बन कर ..क्या वो छलक नहीं जाती !
कोई किसी से पूछ कर साथ नहीं छोड़ता .. कोई साज़ किसी सुर से यूं ही नहीं जुड़ता |
लब कभी यूं ही नहीं लड़खड़ाते … इतने शोर के बीच सन्नाटे यूं ही नहीं हमें मिल जाते |

यह लम्हा किसी समय…. किसी भी बीते…. या आने वाले… लम्हे का मोह्ताज नहीं होता
ऐ मेरे दोस्त तुम… तुम ना होते और हम ..हम न होते तो हमारा यह आज नहीं होता |

Posted by: RAJ | May 15, 2011

Le chalen!!!

एक गुजारीश सी है दिल में के हर लम्हे में साँस ले सकूँ
ले चलें यह बोल मुझे उस जहां, जहाँ हर दिल के लिए एक गीत लिख सकूँ

हर नवीन सहर मुस्कुरा लेता हूँ तेरी आवाज़ सुन कर , सुकून सा आता है देख कर चेहरा तेरा
ले चल मेरी माँ मुझे उस जहां, जहाँ हर बार दिल में तेरे जीतता था बेटा तेरा

एक ऐसी शाम जिसके मय के रंग में डूबा हुआ, हमारी दोस्ती का हर वाक़्या हो
ले चलें मेरे यार मुझे उस जहां, जहाँ हर दिल में कई सुलझे हुए से जज़्बात हो

हर ठंडी रात को तेरी नर्म बातों ने मुझे जगाया, तेरे हर बोल सुन कर मेरा मन मुस्कुराया
ले चले मेरे हमसफ़र मुझे उस जहां, जहाँ हर बार तेरे दिल को जीतने का मैंने मन बनाया

Posted by: RAJ | May 8, 2011

Koi Apna!!!

तुमसे अब तक मिला नही था, फिर भी पहचानी सी लगती हो
अकेले अक्सर मिलती हो सपनो में , भीड़ में अंजानी सी लगती हो |

उस भीड़ में बुला कर रोकना चाहा कई बार , तेरा नाम जुबान् पर आया ऩही
कई नाम दिए है मैने तुझे , तुझे देख कर वो भी याद आयें नही |

तेरे रूप को शब्दो में ढालने की कोशिशे हमने की कई बार
निशब्द हो जाती हमारी कलम , जब भी सोचते तुम्हे हर बार |

हँसी सुनकर तुम्हारी ,दिल की धड़कन बढ़ जाती हमारी..
तुमहारी आवाज़ सुन कर जो सुकून हमए मिलता है, तुम इस दिल के करीब हो इसका गुमान होता है|

जब भी गालो को फूला कर रूठ जाती हो, फिर मूह मोड़ कर इक तरफ बैठ जाती हो
मानने की कोशिश हम करते कई बार , नैनो की मासूमियत दिल जीत लेती हर बार |

शरारती मुझे कह कर, हमेशा तंग करने का दोष देती हो, शरारतों का आगाज़ खुद करके रत जागे मज़ा लेती हो
अपनी नटखट मुकुराहट से मेरा मन मोह लेती हो , हर बार अपने बचपने से मुझे तुम्हे दुलारने पे मजबूर कर देती हो |

यह सच है या सपना , पर यकीन है हमें के मिल गया इतने अनजनो के बीच कोई अपना |

कहते है वक़्त सब कुछ बदल देता है ..
हर पल एक नया आयाम देता है |

हमने हर इस आयाम को अपने अपनों के साथ परखा है
तेरे बैगैर इसको हमने अधूरा सा पाया है …

तुम्हारे आने से एक होने का मतलब समझा हूँ
अब तो खुदको तुझ संग हार के भी एक जीत सा महसूस करता हूँ |

पहेले हम अपने ही भय से बंधे हुए थे जैसे एक बंदिनी
छूट गए सारे डर, गिले, शिकवे ..जब हम तुम्हारे हुए नंदिनी

Posted by: RAJ | April 30, 2011

Ek Nayi Soch!!!

मेरा दिल भारी सा है , आखो में नमी महसूस करता हू |
कल का कोई फ़ैसला, ग़लत जाहिर मालूम होता है |

जब भी अपने आपको, आईने में देखता हू |
आईने के हर टुकड़े में, मेरा अकेलापन छलकता है |

भूल कर अपने गीले को, यह एहसान अपने बीते हुए कल पर करता हू |
जो हुआ सो हुआ, यह मान कर मुसुकरा लेता हू |

ग़लत होगा या सही यह सोच कर, हर बार अपने आपको रोक लेता हू |
पर हर बार, एक आराध्य अपने करम से मेरा हौसला बढ़ा जाता है |

अब के हौसला नही झुकेगा, यह संकल्प लेता हू |
फिर एक बार, कोई करम योगी धरम की राह पर चलता हुआ जान पड़ता है |

आशाओं से ही, अपने जीवन को एक नया आयाम देता हू |
हर साँस में ज़ींदगी जीऊँगा, यह इरादा रखता हू |

Posted by: RAJ | March 22, 2010

Dosti!!

कुछ रोज पहचाने से चेहरो को देख कर ,,,,मुसकुरा उठे हम
मिल गये यार दोस्त फिर,,,,,, खिल खिला उठे हम।

हम बैठे सब साथ साथ ,,,,,हुई कुछ बाते और कुछ नयी कहाँनियो से मुलाकात
एक पल में लगा हम फिर जी लिये ,,,,,, और फिर सवर गये हमारे दिल के जज्बात ।

सब की आँखों में एक ही सवाल था,,,,,
” ए मेरे दोस्त बता तु इतने दिन कहाँ था।”

जब हम सुनते अपने शरारतो के किस्से दोबारा
ऐसा लगता जैसे आ गये मस्ती के दिन दोबारा।

कह्ते है समय बीत्ते देर नही लगती
सच है यार मेरे,,,, आज की शाम तुमहारे बिना इतनी जल्दी नही ढलती।

अल्विदा कहें के ,,,,,तुम लोगो को जाने न दुगा
“सालो फिर मिलुगा” इसका वादा जरूर करूगा।

तुम लोगो से मिल के जो हंसी लबों पर आ-ई है
हमारी दोस्ती यु ही बनी रहे ,,, यही उस रब से दुहाई है।

Posted by: RAJ | March 19, 2010

Phir Milenge !!!

कुछ ऐसा कहा उन्होने तनहायी सी चुब्ने लगी
और आसुओ की ओस मेरे मन को भीगोने लगी।।

कैइ वार सोचा काश रोक लेता उन्हे
पर जब मनाने लगा तो लगा हमारी दोस्ती की सान्स भी जाती रही ।।

“क्या फर्क पडता है” यह सोच कर हम ने मन को समझा लिया
अपनी मुकुराहट से इस दर्द को छुपा लिया ।।

इस उम्मीद से की फिर एक सुबह जो तुम्हारी और मेरी जिन्दगी आएगी
जब हम फिर मिलेगे और हमारे बीच की यह काली रात भी बीत जायेगी।।

Posted by: RAJ | March 18, 2010

DEKHA HAI!

देखा है, उन भुझी हुई आखो में बस्ते हुए सपनो को ।
जो आज भी अपनी कोशीश से, अपने सपनो में वो पर लागा सके।

देखा है उस प्यास से थर थराथे हुए होठो को ।
जो आज भी अपनी कोशीश से,झुका दे वो आसमान जो उसकी प्यास भुझा सके ।

देखा है उन थके हुए कान्धों को ।
जो आज भी अपनी कोशीश से, धरती के सीने से हरा सोना निकाल सके ।

देखा है उन मटमैलेये पैरो को
जो आज भी अपनी कोशीश से, दौड रहे है ताकी अपनी मन्जिल पा सके ।

अब देखना है अपने अन्दर के उस इन्सान को
जो आज भी अपनी कोशीश से अपने व्यक्तित्तव को जोड सके ।

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