Posted by: RAJ | July 23, 2011

यह लम्हा !!

सादगी कभी तैयारी के साथ नहीं आती !
मुस्कुराहट किसी समय कोई सोच बन कर नहीं छुप जाती !
चलती है तो है बस सासें .. जो मंजिल पर आ कर नहीं रुक जाती |

जिंदगी कभी घडी के काटों में नहीं गिनी जाती !
ख़ुशी किसी समय कोई आसूं बन कर ..क्या वो छलक नहीं जाती !
कोई किसी से पूछ कर साथ नहीं छोड़ता .. कोई साज़ किसी सुर से यूं ही नहीं जुड़ता |
लब कभी यूं ही नहीं लड़खड़ाते … इतने शोर के बीच सन्नाटे यूं ही नहीं हमें मिल जाते |

यह लम्हा किसी समय…. किसी भी बीते…. या आने वाले… लम्हे का मोह्ताज नहीं होता
ऐ मेरे दोस्त तुम… तुम ना होते और हम ..हम न होते तो हमारा यह आज नहीं होता |


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