Posted by: RAJ | April 30, 2011

Ek Nayi Soch!!!

मेरा दिल भारी सा है , आखो में नमी महसूस करता हू |
कल का कोई फ़ैसला, ग़लत जाहिर मालूम होता है |

जब भी अपने आपको, आईने में देखता हू |
आईने के हर टुकड़े में, मेरा अकेलापन छलकता है |

भूल कर अपने गीले को, यह एहसान अपने बीते हुए कल पर करता हू |
जो हुआ सो हुआ, यह मान कर मुसुकरा लेता हू |

ग़लत होगा या सही यह सोच कर, हर बार अपने आपको रोक लेता हू |
पर हर बार, एक आराध्य अपने करम से मेरा हौसला बढ़ा जाता है |

अब के हौसला नही झुकेगा, यह संकल्प लेता हू |
फिर एक बार, कोई करम योगी धरम की राह पर चलता हुआ जान पड़ता है |

आशाओं से ही, अपने जीवन को एक नया आयाम देता हू |
हर साँस में ज़ींदगी जीऊँगा, यह इरादा रखता हू |


Responses

  1. A good beginning….keep the words flowing.
    All the best.

    • Thanks Buddy .. New begining fr this year


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